Tuesday, October 2, 2012

Munshi Premchand's Stories मुंशी प्रेमचन्द की रचनाएँ: पूस की रात

Munshi Premchand's Stories मुंशी प्रेमचन्द की रचनाएँ: पूस की रात: हल्कू ने आकर स्त्री से कहा-सहना आया है । लाओं, जो रुपये रखे हैं, उसे दे दूँ, किसी तरह गला तो छूटे । मुन्नी झाड़ू लगा रही थी। पीछे फिरकर...

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